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Hindi Dada: जिनका मिलना नहीं होता मुकद्दर में, उनसे मोहब्बत कसम से कमाल की होती है | Jinka milna nahi hota mukaddar mein,unse mohabbat kasam se kamaal ki hoti hai

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Journey of life | जीवन के सफ़र   में हमने अक्सर लैला मजनू, हीर रांझा, शीरी फरिहाद | Laila Majnu, Heer Ranjha, Sheri farihad  की stories तथा उनकी Love Story के बारे में सुना है। इनके प्रेम कहानियों पर कई फिल्में | pictures   भी बन चुकी है जोकि सुपर हिट | superhit  साबित हुई है। हमने पारो और देवदास | Paro and Devdas को  भी  फिल्मों में देखा है तथा उनकी प्रेम कहानियां और उसके अंजाम को भी देखा है।  आज मैं किस्से कहानियों की बजाए अपनी biography में जिंदगी में हुए सच्चे प्यार | Holi love को बताऊंगा, मोहब्बत की कसम यह वास्तव में ही एक निस्वार्थ, निशब्द और पूरी तरह से पवित्र प्यार था।  इस प्यार में कभी भी प्रेमी और प्रेमिका की आपस में मुलाकात नहीं हुई और कभी भी कोई बात नहीं हुई, उसके बावजूद उन दोनों में अटूट, गहरा और पावन प्यार था। सालों तक मात्र दिन में कुछ सेकंड तक ही नजर से नजर दिन में एक बार मिलती थी, वह भी कई बार कई कई दिन तक नहीं मिल पाती थी। कभी ना मिलने और कभी बातचीत ना होने के बावजूद भी उनके प्यार को केवल वह दोनों ही समझ सक...

Hindi Dada: यह जंगल, यह नदियां, यह अंबर पुकारे | yah jungle yah nadiyan yah Ambar pukare

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जंगल कराह रहे हैं, नदिया आहे भर रहे हैं और अंबर सिसक रहा है ।  यह जंगल यह नदिया यह अंबर पुकारे,  हे मानव अपने कुकर्मों से हमें बचा रे।  आज मानव के कुकर्मो तथा नासमझी तथा स्वार्थ पूर्वक रवैया अपनाने के कारण हालात बहुत ही ज्यादा खराब हो चुके हैं तथा खतरनाक स्टेज पर पहुंच चुके हैं। आज मानव की नादानियां इतनी बढ़ चुके हैं कि पूरी पृथ्वी | earth ही संकट में घिर चुकी है। पृथ्वी के ऊपर एक खतरनाक खतरा मंडरा रहा है। तथा उसके अस्तित्व पर ही खतरा आ चुका है। जाहिर सी बात है कि अगर bhumi पर संकट आया तो यह संकट सभी जीव जंतु, जंगलों, नदियों और मानव जाति पर भी अपना विनाशकारी प्रभाव दिखाएगा।  आज का मानव अपने निजी स्वार्थों को पूरा करने के लिए जाने अनजाने इस पृथ्वी का बहुत सा अहित भी कर रहा है। आज हालत यह हो चुके हैं कि भूमि में नदियों का जल भी दूषित हो चुका है, वायुमंडल में भी भारी मात्रा में प्रदूषण फैल चुका है तथा कल कारखानों से निकला हुआ जहरीला धुआं वातावरण में फैलकर समूची मानव जाति, पशु पक्षियों और जीव-जंतुओं के लिए अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर रहा है।  जिससे अंबर में भी स...

मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा वह खेत में चारा चरती थी | meri bhains Ko danda kyon mara vah khet mein chara charti thi

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गांव में रहने का अपना एक अलग ही आनंद होता है। गांव वाले अत्यंत ही भोले मासूम और खुशमिजाज होते हैं, उन्हें ज्यादा चालाकियां नहीं आती। आमतौर पर वह सीधी और सच्ची बात करना ही पसंद करते हैं। सादा रहन-सहन, सादी जिंदगी, सादा ही खानपान लेकिन उम्दा जीवन। ग्राम वासियों का जीवन अगर देखा जाए तो शहरों की तुलना में बहुत ही बेहतर होता है। मगर जो सुख सुविधाएं तथा ऐसो आराम के साधन शहरों में मौजूद हैं, वह गांव में नहीं मिलते हैं।  वर्तमान समय में रोजगार की तलाश में गांव वाले भी शहरों की तरफ व्यापक स्तर पर पलायन कर रहे हैं, क्योंकि शहरों में उद्योग धंधे काफी मात्रा में मौजूद होते हैं जोकि आमतौर पर गांव में नहीं होते, इसके अतिरिक्त बच्चों की पढ़ाई के लिए उच्च कोटि के विद्यालय , इलाज के लिए अच्छे अस्पताल आदि सब बड़े शहरों में ही देखने को मिलते हैं। हर इंसान अपने बच्चों को अच्छे जिंदगी देना चाहता है। इसी ख्वाबों के साथ वर्तमान समय में ग्राम से शहर की तरफ व्यापक रूप से पलायन हो रहा है तथा शहरों में भी जनसंख्या के अत्यधिक दबाव के कारण दबाव बढ़ता जा रहा है। मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा वह खेत में चारा चरत...

जब हम जवां होंगे जाने कहां होंगे | jab ham Javan honge jaane Kahan honge

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मेरे अपने विचार में इस संसार में बड़े से बड़ा ज्योतिषी भी किसी बच्चे के भविष्य के बारे में सौ परसेंट सही भविष्यवाणी नहीं कर सकता, और तो और किसी भी बच्चे को जन्म देने वाले माता-पिता को भी अपने बच्चे का भविष्य नहीं पता होता।  किसी को नहीं पता होता उस बच्चे की कद काठी कैसे निकलेगी?  उस बच्चे का चाल चलन कैसा होगा?  उस बच्चे में बुद्धिमानी का स्तर कितना होगा?  वह बच्चा कितनी पढ़ाई करेगा?  वह बच्चा जीवन में कामयाब होगा या नहीं?   कुल मिलाकर बात यह है की किसी भी बच्चे के बारे में उसके भविष्य के लिए पूर्ण रूप से सत्य  भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। बहुत कुछ बच्चे की परवरिश तथा घर के माहौल पर भी निर्भर करता है। कई बार अच्छे घरों के बच्चे भी पढ़ नहीं पाते चाहे उनके मां बाप कितने भी अच्छे विद्यालय में उनका एडमिशन ना करवा दें। वहीं इसके विपरीत कई बार अत्यंत ही गरीबी में पले पड़े  तथा अनपढ़ मां बाप के बच्चों को भी पढ़ाई में बहुत आगे जाते हुए देखा गया है।  अभी हाल फिलहाल में कुछ ऐसे बच्चों को भी आई ए एस, पी सी एस, आई पी एस बनते हुए देख...

स्कूल में बिना गलती के हुई पिटाई का दर्द | The pain of getting beaten up at school for no fault of yours

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बचपन नादान होता है, बच्चे चंचल होते हैं, उन्हें अच्छे बुरे का एहसास नहीं होता।   अगर बच्चों में चंचलता ही ना हो तो फिर वह बचपन कैसा?  बचपन में हर बच्चे में थोड़ा नटखट पन होना भी जरूरी होता है। हर बच्चे में कुछ ना कुछ योग्यता अवश्य होती है, फर्क बस इतना होता है की कुछ बच्चों की योग्यता सामने आ जाती है और कुछ बच्चों की योग्यता छिप जाती है, कुछ बच्चों की इमेज ही उनके परिजन व दोस्त गलत बना देते हैं, जबकि वह बच्चा गलत नहीं होता। दुनिया में अलग अलग माहौल में अलग-अलग बचपन को देखा जा सकता है। बचपन में दिल दुखने वाला अनुभव | heart breaking childhood experience  मुझे भी आज भी अपना बचपन बहुत ही अच्छी तरह से याद है। पढ़ाई में मैं अपने बचपन से ही होशियार था। मुझे आज भी बहुत अच्छी तरह से वह दिन याद है जब मैं पांचवी कक्षा में पढ़ता था। उस समय में पांचवी के बोर्ड के पेपर होते थे। उस समय board ke exam के लिए एक सेंटर बनाया जाता था जिसमें आसपास के कई विद्यालयों के बच्चों का एग्जाम होता था।  मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है की पांचवी की पढ़ाई में मैंने उक्त सेंटर में टॉप पोजीशन पाई ...

जीवन के सफर में राही मिलते हैं बिछड़ जाने को | jivan ke safar mein rahi milte hain bichhad jaane ko

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मानव जीवन अत्यंत ही अनमोल है। हिंदू धर्म के मुताबिक मानव को 84 लाख योनियों के बाद ही मानव शरीर प्राप्त होता है। इसे ईश्वरीय कृपा ही कह सकते हैं। अगर ध्यान से देखा जाए तो पूरा मानव जीवन ही एक फिल्म की तरह दिखाई पड़ता है, जिसमें मानव अपने ईश्वर के द्वारा निर्धारित कार्य करके पुनः ईश्वर के चरणों में समा जाता है।  जीवन का सफर | Journey of life मैं अपनी ही बात करता हूं, कभी बैठ कर एकांत में सोचता हूं, मात्र 15-20 मिनट में ही पूरा जीवन की मुख्य मुख्य घटनाएं आंखों के सामने एक पिक्चर की तरह ही घूम जाती है। वह दिन भी क्या दिन थे जब हम छोटे-छोटे बच्चे हुआ करते थे।  क्या मस्तियां थी?  क्या जीवन में उल्लास था?  पल पल बच्चों से झगड़ना और कुछ पल के बाद ही  सब कुछ भूल कर फिर वही ठहाके तथा शरारते ।  जब स्कूल में पढ़ाई के लिए दाखिला हुआ | Jab vidyalay mein padhaai ke liye hua admission  कुछ बड़े हुए तो पिताजी ने स्कूल में पढ़ने के लिए एडमिशन करवा दिया। वह भी क्या दिन थे जब तख्तियां लेकर स्कूल में जाया करते थे तथा सलेटी या चाक द्वारा तख्ती पर लिखते थे।आजकल की नई...