सरसों की खेती का सरल तरीका सीख कर किसान भाई अपने खेतों से सरसों की अच्छी पैदावार ले सकते हैं।

आज की पोस्ट में हम जानकारी | jankari देंगे कि सरसों की खेती कैसे करें, sarso ki kheti, mustard farming, Sarso ki kheti kab kare, सरसों की खेती का तरीका, bhumi में सरसों की बुवाई का समय, सरसों का साग, मक्के की रोटी सरसों का साग आदि की विस्तार से जानकारी देंगे।


भारत में रवि की प्रमुख फसलों में सरसों का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। सरसों एक प्रमुख तिलहनी फसल है, सरसों का भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था में प्रमुख स्थान है। सरसों को लाही भी कहा जाता है।

 वर्तमान समय में भारत में सरसों की खेती अत्यंत ही लोकप्रिय होती जा रही है। भारत सरकार भी सरसों की खेती को बहुत बढ़ावा दे रही है, इसकी प्रमुख वजह भारत में खाद्य तेलों का भारी मात्रा में आयात करना है। भारत सरकार की पूरी कोशिश है कि भारत खाद्य तेलों में भी आत्मनिर्भर बने, जिसके कारण bhumi में तिलहनी फसलों जैसे सरसों के उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका परिणाम भी सामने आ रहा है तथा प्रतिवर्ष भारत तिलहनी फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ता जा रहा है।

 सरसों के उत्पादन में किसान भाइयों को  मुनाफा दूसरी फसलों की अपेक्षा कुछ अधिक प्राप्त हो रहा है, जिसके कारण कृषक भाइयों का रुझान भी तिलहनी फसलों के उत्पादन के प्रति बढ़ता ही जा रहा है। Sarson ki kheti के क्षेत्र | भूमि में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।



                                                                     (Sarso ki kheti image)


सरसों बोने का सही समय कौन सा है | सरसों की बुवाई का समय | Sarso ki kheti kab kare 


भारत में पीली सरसों की बुवाई का समय शरद ऋतु का आरंभ माना जाता है, क्योंकि सरसों के अच्छे उत्पादन के लिए ठंडा मौसम होना जरूरी होता है। सरसों के लिए सामान्यता 16 से 26 सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। आमतौर पर भारत में किसान अक्टूबर माह से सरसों की बुवाई शुरू कर देते हैं, अगर सही समय पर सरसों की खेती | sarso ki kheti की जाए तो किसान बंधु अच्छा उत्पादन पा सकते हैं।


सरसों की खेती का तरीका | सरसों की खेती कैसे करें


सरसों की खेती के लिए किसान को सर्वप्रथम खेत को अच्छी तरह से जोत कर समतल कर लेना चाहिए। खेत की जुताई के बाद अच्छी तरह से पाटल लगाकर मिट्टी को भुरभुरा कर लेना चाहिए, तदुपरांत खेत में सरसों का बीज डाल कर बहुत हल्की हैरो करके पटेला लगा देना चाहिए, ध्यान देना चाहिए कि सरसो के बीज बोने के समय खेत में मिट्टी में हल्की नमी होने जरूरी होती है, जिससे सरसों अच्छी उगती है। 

सरसों की फसल के लिए बलुई दोमट मिट्टी व कुछ रेतीली मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है। 

सरसों की फसल मे कीट पतंगे से बचाव के लिए आवश्यकतानुसार वैज्ञानिक विधि से कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकता है। वैसे किसानों को अब फसलों को जैविक विधि से उगाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। 

काली सरसों की बुवाई का समय सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक अच्छा माना जाता है।





खाद उर्वरक प्रबंधन 

सरसों की खेती के लिए उर्वरक भी बहुत जरूरी है । क्योंकि उर्वरक से ही पौधों को ताकत मिलती है। अच्छी फसल लेने के लिए सर्वप्रथम प्रति हेक्टर खेत में 10 से 13 टन गोबर की खाद,  200 किलो  सुपर फास्फेट, 50 किलो पोटाश बुवाई से पूर्व खेत में मिलाने है। फसल उगने के बाद 200 किलो यूरिया दो से तीन बार किस्तों में, प्रति हेक्टर सरसों की खेती फसल में डालना है, जिससे पैदावार अच्छी हो सकती है।
                                               

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बीज दर

सरसों की बुवाई के लिए सामान्यता शुष्क क्षेत्रों में 4.5 किलोग्राम से 5.5 किलोग्राम तथा सिंचित क्षेत्र में 3.5 किलोग्राम से 4.5 किलोग्राम बीज की मात्रा प्रति हेक्टर पर्याप्त रहती है।
 

सरसों में कितनी बार पानी देना चाहिए | Sarson mein kitni bar Pani Dena chahie

सरसों की खेती में पानी की जरूरत कम पड़ती है। सरसों की फसल को आवश्यकतानुसार पानी देना चाहिए तथा ध्यान रखना चाहिए की पानी ज्यादा देर तक उसकी जड़ों में ना रुके, वरना सरसों की फसल खराब हो सकती है। सरसों की फसल को प्रथम सिंचाई की जरूरत 30 से 40 दिन बाद और द्वितीय सिंचाई जब फसल में फूल और दाने आ जाते हैं, तब पड़ती है।

1 एकड़ में कितना सरसों होना चाहिए

वर्तमान समय में भारत मैं कई कृषि विश्वविद्यालय ने अपने गहरी रिसर्च के बाद सरसों के  कई ने उन्नत बीज तैयार की है। जिन से सरसों के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। सामान्य तौर पर सरसों का उत्पादन प्रति एकड़ 8 से 10 कुंटल तक हो जाता है। फसल का उत्पादन बहुत हद तक जलवायु और खेत की मिट्टी के ऊपर भी निर्भर करता है।

1 बीघा में कितने कुंटल निकलता है

एक बीघा खेत में सामान्य तौर पर डेढ़ कुंटल तक सरसों की पैदावार हो जाती है, जोकि खेत की मिट्टी और जलवायु के ऊपर निर्भर करती है।


किसानों के बीच प्रचलित किस्से कहानियां

किसानों के बीच में खेती करते हुए किस्से कहानियां भी व्यापक तौर पर सुनाए जाते हैं। यह कहानियां दादा दादी की कहानी, नाना नानी की कहानी, परी की कहानी, आसमानी परिया, भूतिया दादा, प्रभु श्री राम की कहानी आदि भी सुनाई जाते हैं। आमतौर पर वृद्ध किसान और मजदूर अपने संग साथियों और बच्चों को यह कहानियां बहुत जोर से चाव से सुनाते हैं इसके अतिरिक्त khatarnak bhoot, bhutiya dada, bhoot khatarnak, khatarnak bhutni, bhalu dada, bhoot dada, dant wala bhoot, khet khaliyan आदि की कहानियां भी सुनाते हैं। veh khet में इन कहानियों को खेती का कार्य करते हुए बड़े चाव से सुनाते हैं। भारत के किसान भाइयों के बीच में सरसों की खेती अत्यंत लोकप्रिय है, तथा प्रतिवर्ष सरसों के बुवाई रकबे में बढ़ोतरी हो रही है।

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