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जीवन के सफर में माता वैष्णो देवी | mata vaishno devi के दर्शन हेतु मेरी प्रथम यात्रा

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अपनी Biography की आज की पोस्ट में मैं जीवन के सफर | journey of life में माता वैष्णो देवी की प्रथम यात्रा के बाबत सच्ची व वास्तविक जानकारी दूंगा, और यात्रा संबंधित कुछ महत्वपूर्ण अनुभव आप सभी के साथ सांझा करूंगा। मेरे यह जिंदगी के अनुभव माँ वैष्णो देवी के दर्शन के लिये जाने वाले माँ के  भक्तों के लिये उपयोगी साबित हो सकते हैं। मां भगवती की असीम कृपा से मुझे भी कई बार माता वैष्णो देवी के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।                                                   "Image generated for illustrative purpose" दोस्तों ,             जैसे कि मैं Funda of life में पूर्व में ही अपनी विभिन्न पोस्टों में अपने बारे में काफी विस्तार से बता चुका हूं कि किस तरह मुझे छोटी उम्र में ही घर से काफी दूर जाकर अकेले ही दुकान करनी पड़ी और जिंदगी के तमाम उतार-चढ़ाव और झंझावात को झेलते हुए मेरी जिंदगी धीरे-धीरे आगे बढ़ रह...

माता लक्ष्मी जी की आरती

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लक्ष्मी माता जी की आरती  जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निश दिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ जय लक्ष्मी माता... उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ जय लक्ष्मी माता... दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ जय लक्ष्मी माता... तुम ही हो पतिव्रता, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता॥ जय लक्ष्मी माता... जिस घर में तुम रहती, सभी सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ जय लक्ष्मी माता... तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ जय लक्ष्मी माता... शुभ गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ जय लक्ष्मी माता... महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ जय लक्ष्मी माता...

हनुमान चालीसा: गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भक्तिमय महाकाव्य

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श्री हनुमान चालीसा हिंदी  (गोस्वामी तुलसीदास कृत) दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेउ साजै॥ संकर सुवन केसरी नन्दन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥...

"हरिद्वार: आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम"

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हरिद्वार: एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र हरिद्वार उत्तराखंड राज्य के गंगा नदी के किनारे बसा एक प्रमुख तीर्थस्थल है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दिया गया है।  यह शहर अपने प्राचीन मंदिरों, आश्रमों, घाटों और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। हरिद्वार का शाब्दिक अर्थ है "हरि का द्वार" यानी भगवान विष्णु का द्वार, लेकिन यह जगह शिव भक्तों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हरिद्वार का धार्मिक महत्व हरिद्वार चार धाम यात्रा के प्रमुख गेटवे के रूप में जाना जाता है, जो बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, और यमुनोत्री की तीर्थ यात्रा का प्रारंभिक बिंदु है। हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए गंगा नदी का विशेष महत्व है, और हरिद्वार में गंगा का प्रवाह तीर्थयात्रियों के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। यह वह स्थान है जहां गंगा मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है, और यहां स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलने का विश्वास है। हरिद्वार का उल्लेख हिंदू धर्मग्रंथों में भी किया गया है, और यहां पर आने वाल...