श्मशान घाट से पैसे उठाकर दोस्तों को चने खिलाए - बचपन की एक सच्ची और दिलचस्प कहानी
जैसा कि मैं पूर्व में बता चुका हूं कि मेरा जन्म और परवरिश एक निहायत ही पिछड़े हुए गांव में हुआ था, जोकि जंगल के किनारे पर स्थित था। हमारे गांव से मुख्य सड़क लगभग ढाई किलोमीटर दूर थी, इसका वर्णन मैं अपनी बायोग्राफी | Biography में लिखी एक पोस्ट जिसका हेडिंग था, जिनका मिलना नहीं होता मुकद्दर में उनसे मोहब्बत कसम से कमाल की होती है, में विस्तार से दे चुका हूं। बचपन की एक अनोखी और दिलचस्प याद—कैसे हमने श्मशान घाट से पड़े पैसे उठाकर दोस्तों को चने खिलाए। दोस्तों, यह बात उस वक्त की है जब मैं कक्षा 6 का छात्र था और मेरी उम्र लगभग 10 वर्ष के आसपास थी। हमारे गांव में प्राथमिक विद्यालय था, जहां पर कक्षा 5 तक की पढ़ाई होती थी। उसके बाद गांव से लगभग 3 किलोमीटर दूर दूसरे गांव में जूनियर हाई स्कूल था। हमें प्रतिदिन 3 किलोमीटर पैदल ही चल कर स्कूल में पढ़ने के लिए जाना पड़ता था। उस दौर में कोई थ्री व्हीलर, बस, वेन, तांगा आदि हमारे गांव में नहीं आता था। जब हम अपने स्कूल जाते थे तो घर से 3 किलोमीटर दूर स्कूल तक हमें दूर-दूर तक कोई भी प्राणी नजर नहीं आत...