बिना गलती के मिली सज़ा: स्कूल में पिटाई का दर्द और एक छात्र की सच्ची कहानी
बचपन नादान होता है, बच्चे चंचल होते हैं, उन्हें अच्छे बुरे का एहसास नहीं होता। अगर बच्चों में चंचलता ही ना हो तो फिर वह बचपन कैसा? बचपन में हर बच्चे में थोड़ा नटखट पन होना भी जरूरी होता है। हर बच्चे में कुछ ना कुछ योग्यता अवश्य होती है, फर्क बस इतना होता है की कुछ बच्चों की योग्यता सामने आ जाती है और कुछ बच्चों की योग्यता छिप जाती है, कुछ बच्चों की इमेज ही उनके परिजन व दोस्त गलत बना देते हैं, जबकि वह बच्चा गलत नहीं होता। दुनिया में अलग अलग माहौल में अलग-अलग बचपन को देखा जा सकता है। बचपन में दिल दुखने वाला अनुभव | heart breaking childhood experience मुझे भी आज भी अपना बचपन बहुत ही अच्छी तरह से याद है। पढ़ाई में मैं अपने बचपन से ही होशियार था। मुझे आज भी बहुत अच्छी तरह से वह दिन याद है जब मैं पांचवी कक्षा में पढ़ता था। उस समय में पांचवी के बोर्ड के पेपर होते थे। उस समय board ke exam के लिए एक सेंटर बनाया जाता था जिसमें आसपास के कई विद्यालयों के बच्चों का एग्जाम होता था। मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है की पांचवी की पढ़ाई में मैंने उक्त सेंटर में टॉप पोजीशन पाई ...