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रहीम के 20 प्रमुख दोहे अर्थ सहित।

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रहीम के 20 प्रसिद्ध दोहे और उनके अर्थ : 1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय।। अर्थ: प्रेम का धागा बहुत नाजुक होता है, इसे झटके से मत तोड़ो। यदि यह धागा टूट गया, तो दोबारा जोड़ने पर गाँठ पड़ जाती है, जिससे रिश्ते में खटास आ जाती है। 2. रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय। सुनी अठिलैहें लोग सब, बांट न लैहें कोय।। अर्थ: अपने मन की पीड़ा को अपने भीतर ही छिपाकर रखो, क्योंकि लोग इसे सुनकर केवल उपहास करेंगे, लेकिन कोई आपकी परेशानी में मदद नहीं करेगा। 3. जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग। चंदन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग।। अर्थ : जो व्यक्ति स्वभाव से उत्तम है, उसका बुरा संगति भी कुछ बिगाड़ नहीं सकती। जैसे चंदन पर सांप लिपटने के बावजूद वह विषाक्त नहीं होता। 4. रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहां काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।। अर्थ : छोटे और बड़े का अपना-अपना महत्व होता है। जहां सुई की आवश्यकता होती है, वहां तलवार कुछ नहीं कर सकती। 5. रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार। रहिमन फिर-फिर पोइए, टूटे मुक्ताहार।। अर्थ : यदि आपका को...