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दो दोस्त - दौलत से बड़ी दोस्ती

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  सच्ची दोस्ती - एक ईश्वरीय सोगात और अनमोल खजाना  एक छोटे से गाँव में दो बच्चे रहते थे। एक का नाम आरव   था और दुसरे का नाम मोहन। दोनों की उम्र लगभग बारह वर्ष थी। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और बचपन से सबसे अच्छे दोस्त थे। लेकिन उनकी जिंदगी एक- दुसरे से बिल्कुल अलग थी। आरव गाँव के सबसे अमीर व्यापारी का बेटा था। उसके घर में बड़ी हवेली, महंगी गाड़ियाँ, नौकर- चाकर और हर तरह की सुविधाएँ थी। उसे किसी चीज की कमी नही थी। दूसरी और मोहन एक गरीब किसान का बेटा था। उसके पिता दूसरो के खेतों में मजदूरी करते थे। घर मिट्टी का था, कपड़े साधारण थे और कई बार दो वक्त का खाना भी मुश्किल से मिलता था। फिर भी दोनों की दोस्ती ऐसी थी कि पूरे गाँव में उसकी मिसाल दी जाती थी। हर सुबह दोनों स्कूल जाते। आरव के पास कई साईकिल   थी, जबकि मोहन पैदल चलता था। लेकिन आरव अक्सर साईकिल से उतरकर उसके साथ पैदल चलने लगता ताकि दोस्त अकेला महसूस ना करें। स्कूल में जब लंच का समय होता तो आरव अपना टिफिन मोहन के साथ बाँटकर खाता। मोहन पहले मना करता, लेकिन आरव हमेशा कहता,” दोस्ती में मेरा और तेरा नही होत...

प्रेमपत्र की खातिर 150 किलोमीटर साइकिल यात्रा: फेरीवाले का रूप धरकर निभाई सच्ची दोस्ती

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यह कहानी सच्चे प्रेम की उस गहराई को दर्शाती है, जिसमें एक व्यक्ति ने अपने दोस्त के  प्रेमपत्र को सही जगह पहुंचाने के लिए 150 किलोमीटर की लंबी साइकिल यात्रा की। हालात ऐसे थे कि सीधे जाना संभव नहीं था, इसलिए उसने फेरीवाले का रूप धारण किया। रास्ते की कठिनाइयाँ, थकान, भूख और डर—इन सबको नजरअंदाज करते हुए उसने अपनी दोस्ती और दोस्त के  प्यार को प्राथमिकता दी। यह कहानी बताती है कि जब इरादे मजबूत हों और दिल में सच्चा प्रेम हो, तो कोई भी दूरी या बाधा बड़ी नहीं होती। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि समर्पण, साहस,दोस्ती  और सच्चे प्रेम की मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है कि सच्चा प्यार कभी हार नहीं मानता। अपनी Biography में आज की पोस्ट जीवन के सफर में जानकारी दूंगा, कि किस तरह मुझे अपने सच्चे मित्र की मोहब्बत की खातिर फेरीवाला का रूप धारण करके लगभग 150 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से करनी पड़ी। उक्त जिंदगी के सफर में पहाड़ों की यात्रा भी शामिल थी। दोस्तों,           जैसा कि मैं अपनी पूर्व की कई पोस्ट में अपने बारे में विस्तार से बता चुका हूं, कि...

जिनका मिलना नहीं होता मुकद्दर में, उनसे मोहब्बत कसम से कमाल की होती है : एक सच्ची प्रेम कहानी

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Journey of life | जीवन के सफ़र   में हमने अक्सर लैला मजनू, हीर रांझा, शीरी फरिहाद | Laila Majnu, Heer Ranjha, Sheri farihad  की stories तथा उनकी Love Story के बारे में सुना है। इनके प्रेम कहानियों पर कई फिल्में | pictures   भी बन चुकी है जोकि सुपर हिट | superhit  साबित हुई है। हमने पारो और देवदास | Paro and Devdas को  भी  फिल्मों में देखा है तथा उनकी प्रेम कहानियां और उसके अंजाम को भी देखा है।  आज मैं किस्से कहानियों की बजाए अपनी biography में जिंदगी में हुए सच्चे प्यार | Holi love को बताऊंगा, मोहब्बत की कसम यह वास्तव में ही एक निस्वार्थ, निशब्द और पूरी तरह से पवित्र प्यार था।  इस प्यार में कभी भी प्रेमी और प्रेमिका की आपस में मुलाकात नहीं हुई और कभी भी कोई बात नहीं हुई, उसके बावजूद उन दोनों में अटूट, गहरा और पावन प्यार था। सालों तक मात्र दिन में कुछ सेकंड तक ही नजर से नजर दिन में एक बार मिलती थी, वह भी कई बार कई कई दिन तक नहीं मिल पाती थी। कभी ना मिलने और कभी बातचीत ना होने के बावजूद भी उनके प्यार को केवल वह दोनों ही समझ स...