रॉकेट और सैटेलाइट विज्ञान: अंतरिक्ष की अद्भुत यात्रा
रॉकेट और सैटेलाइट विज्ञान मानव सभ्यता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है, जिसने हमें पृथ्वी की सीमाओं से बाहर जाकर अंतरिक्ष को समझने का अवसर दिया है। रॉकेट तकनीक के माध्यम से ही सैटेलाइट को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाता है, जिससे संचार, मौसम पूर्वानुमान, नेविगेशन और रक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव आया है। आज हम जिस इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क और GPS सेवाओं का उपयोग करते हैं, उनमें सैटेलाइट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रॉकेट मूल रूप से न्यूटन के तीसरे नियम “हर क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है” पर आधारित होते हैं। जब रॉकेट ईंधन को तेजी से नीचे की ओर छोड़ता है, तो वह ऊपर की ओर गति करता है और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को पार कर अंतरिक्ष में पहुंचता है। सैटेलाइट को रॉकेट के जरिए निर्धारित कक्षा में स्थापित किया जाता है, जहां वे पृथ्वी के चारों ओर लगातार घूमते रहते हैं। भारत में ISRO ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसरो ने कई सफल मिशनों के माध्यम से भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। जैसे Chandrayaan और Ma...